Wednesday, February 17, 2010

आर्य समाज की चुनौती से घबराया ज़ाकिर नाईक…

जैसा कि सभी जानते हैं डॉ ज़ाकिर नाईक एक इस्लामी प्रचारक हैं जो हमेशा वेदों और पुराणों की कुरान से तुलना करके उसे या तो नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं या फ़िर ऊटपटांग तर्कों और मनमाने उद्धरणों से हिन्दुओं तथा मुसलमानों दोनों को ही भ्रमित करने की कोशिश करते हैं। इनकी इसी बकवास को खत्म करने के लिये आर्य समाज की परोपकारिणी सभा ने कुछ समय पूर्व इन्हें एक खुली बहस हे 40;ु आमंत्रित किया है, जिसका उत्तर उन्होंने अभी तक नहीं दिया है…
ज़ाकिर नाईक को निम्न चार विषयों पर अपने विचार रखने और उसे हिन्दू ग्रन्थों, वेदों और पुराणों के अनुरूप (कुरान सहित) बहस करने हेतु आमंत्रित किया है -

1) कुरान और वेदों के बीच तुलना
2) पैगम्बर मोहम्मद और गौवध
3) कुरान में विज्ञान और मानवाधिकार,
4) कुरान के अनुसार स्वर्ग और नर्क की अवधारणा…

सभी सज्जनों से आग्रह है कि वे निम्नलिखित वेबसाईट और लिंक्स पर जाकर इसका अवलोकन करें, टिप्पणी करें, इसमें से कोई सामग्री जनजागरण हेतु चाहिये हो लिंक सहित कहीं भी प्रकाशित करें ताकि ज़ाकिर नाइक द्वारा फ़ैलाये जा अनर्गल प्रलाप के खिलाफ़ "अनपढ़ों" को जागरुक बनाया जा सके…

On Hinduism:
Part 1 : http://agniveer.com/featured/naik/
Part 2: http://agniveer.com/featured/naik-hinduism/
Part 3: http://agniveer.com/featured/naik-faq-hinduism/

On Prophet in Vedas:
Part 1: http://agniveer.com/featured/prophet-hindu/
Part 2: http://agniveer.com/featured/prophet-puran/
Part 3: http://agniveer.com/featured/prophet-vedas/

35 comments:

rahul said...

हमारे जैसे निठल्‍लों की इमेल का जवाब देने की उनके पास फुरसत कहां, फिर भी हम हम तो बहुत पहले ही गौवध और विज्ञान पर लाजवाब बातें लिये बैठे है, आओ तो इधर

प्राचीन भारत में गोहत्‍या एवं गोमांसाहार

vedon men vigyan
वेंदों में विज्ञान

February 17, 2010 at 3:28 PM
vikas mehta said...

suresh jee
jakir naaik koi bloggr hai ?

February 17, 2010 at 3:51 PM
nitin tyagi said...

जिस दिन किसी मुल्ले को हुन्दुत्वा समझ आ गया, वो उसी दिन मुल्ला नहीं मनुष्य बन जायेगा

February 17, 2010 at 4:24 PM
Anonymous said...

Mr. Rahul, if you dont want to know anything positive, then please keep your mouth shut, and if you are Pseudo-Secular or Communist, then keep barking... no one is going to listen you...

February 17, 2010 at 5:25 PM
Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

जाकिर नायक ऐसा कोई भी चैलेन्ज स्वीकार क्यों करेगा जिससे उसके प्रोपेगेंडा को नुक्सान हो?

February 17, 2010 at 9:07 PM
विक्रम एक शांत वादळ said...

स्मार्ट इंडियन
very smart

February 17, 2010 at 10:40 PM
rahul said...

पंडित पांडुरंग वामन काणे ने लिखा है ''ऐसा नहीं था कि वैदिक समय में गौ पवित्र नहीं थी, उसकी 'पवित्रता के ही कारण वाजसनेयी संहिता (अर्थात यजूर्वेद) में यह व्यवस्‍था दी गई है कि गोमांस खाना चाहिए'' --धर्मशास्‍त्र विचार, मराठी, पृ 180)

महाभारत में गौ
गव्‍येन दत्तं श्राद्धे तु संवत्‍सरमिहोच्यते --अनुशासन पर्व, 88/5
अर्थात गौ के मांस से श्राद्ध करने पर पितरों की एक साल के लिए तृप्ति होती है

मनुस्मृति में
उष्‍ट्रवर्जिता एकतो दतो गोव्‍यजमृगा भक्ष्‍याः --- मनुस्मृति 5/18 मेधातिथि भाष्‍य
ऊँट को छोडकर एक ओर दांवालों में गाय, भेड, बकरी और मृग भक्ष्‍य अर्थात खाने योग्‍य है

February 17, 2010 at 11:26 PM
rahul said...

वेदों में पृथ्‍वी खडी है
यह बात चौथी कक्षा का विद्यार्थी भी जानता है कि पृथ्‍वी घूमती है लेकिन वेदों में लिखा पृथ्‍वी खडी है
यः पृथ्‍वी व्‍यथमानामद्रहत् यः जनास इंद्रः--- ऋ. 2/12/2
अर्थात है मनुष्‍यो, जिसने कांपती हुई पृथ्‍वी को स्थिर किया, वह इंद्र है


वेदों का घूमता सूर्य
प्रारंभिक स्कूल का विद्यार्थी भी जानता है सूर्य वहीं खडा है वेदों में सूर्य को रथ पर सवार होकर चलने वाला कहा गया है

उदु तयं जातवेदसं देवं वहन्ति केतवः,
दृशे विश्‍वाय सूर्यम ----- ऋ. 1/50/1

अर्थात सूर्य प्रकाशमान है और सारे प्राणियों को जानता है. सूर्य के घोडे उसे सारे संसार के दर्शन के लिए ऊपर ले जाते हैं

February 17, 2010 at 11:33 PM
Vicky G said...

श्रीमान आत्म ग्यानी राहुल को यह पता होना चहिए कि सूर्य भी गतिमान है, वह भी ब्रह्मांड का चक्कर लगा रहा है. हां लेकिन यह बात प्राइमरी पास और खुद को ग्यानी समझने वाले लोग नहीं जानते. और दूसरी बात, स्थिर प्रिथ्वी का मतलब अचल होना नहीं है. प्रिथ्वी क्षण भर के लिए भूकंप आदि के कारण भी अस्थिर हो जाती है. समझे? इसी तरह की अस्थिरता (यानी कंपन) को इंद्र द्वारा शांत करने की बात की गई है. वैसे ये सब प्रतीकात्मक भाषा में लिखा गया है. कोई मूढमति इनका शब्दार्थ निकालकर वेदों को गलत बताने का दुष्प्रचार ना करे तो ही अच्छा है.

February 18, 2010 at 2:24 PM
पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

आजकल यहाँ ब्लागजगत में भी जाकिर नाईक जैसों की नाजायज संताने छद्म भेष में विचरण कर रही हैं...ये जो राहूल नाम के महाश्य हैं, ये उन्ही में से हैं...लेकिन मैं इनकी वास्तविकता से भली भान्ती परिचित हूँ...वैसे असल रूप में इनकी दाल नहीं गली तो आजकल ये महाश्य छद्म भेष में हिन्दू नाम(राहूल्) से प्रोफाईल बना कर हिन्दू धर्म तथा उसके धर्मग्रन्थों के बारे में ऊल जलूल बकवास करते घूम कर रहे हैं। कभी इसका नाम हमने "लम्पट" यूँ ही नहीं रखा था...

February 18, 2010 at 3:38 PM
Anonymous said...

औरंगजेब और बाबर की साहुल जैसी नाजायज कुलादों से आप और उमीद भी क्या कर सकते हैं

February 21, 2010 at 1:15 PM
DR. ANWER JAMAL said...

Vedas are great undoubtedly .

वेदमार्ग

नूनव्यसे नवीयसे सूक्ताय साधया पथः।
प्रत्नवद् रोचया रूचः ।। ऋग्वेद 1:1:8।।
अनुवाद- नये और नूतनतर सूक्तों के लिए पथ हमवार
करता जा, जैसे पिछले लोगों ने ऋचाओं पर अमल किया था।
यज्ञं प्रच्छामि यवमं।
सः तद्दूतो विवोचति किदं ऋतम् पूर्व्यम् गतम।
कस्तदबिभर्ति नूतनौ।
वित्तम मे अस्य रोधसी।। ऋग्वेद 1:105:4।।
अनुवाद- मैं तुझसे सबसे बाद में आने वाले यज्ञ का सवाल पूछता हूँ। उसकी विवेचना वह पैग़म्बर आकर बताएगा। वह पुराना शरीअत का निज़ाम कहाँ चला गया जो पहले से चला आ रहा था ? उसकी नयी व्याख्या कौन करेगा? हे आकाश पृथ्वी! मेरे दुख पर ध्यान दो।


ग़ज़ल



पानी



क्यों प्यासे गली-कूचों से बचता रहा पानी
क्या ख़ौफ था कि शहर में ठहरा रहा पानी
आखि़र को हवा घोल गयी ज़हर नदी में
मर जाऊंगा, मर जाऊंगा कहता रहा पानी
मैं प्यासा चला आया कि बेरहम था दरिया
सुनता हूँ मिरी याद में रोता रहा पानी
मिट्टी की कभी गोद में, चिड़ियों के कभी साथ
बच्चे की तरह खेलता-हंसता रहा पानी
इस शहर में दोनों की ज़फ़र एक-सी गुज़री
मैं प्यासा था, मेरी तरह प्यासा रहा पानी

ज़फ़र गोरखपुरी (मुंबई)
लिप्‍यांतरण : अबू शाहिद जमील
Love for all , Hate for none.

MORE MORE MORE
http://vedquran.blogspot.com/2010/02/blog-post_21.html

February 22, 2010 at 8:03 PM
सौरभ आत्रेय said...

डॉक्टर अनवर जमाल ये उटपटांग वक्तव्य देना छोडो. जो अनुवाद आप कर रहे हैं वो कहाँ से पढ़ा है आपने जरा उसका reference दो. आप भी जाकिर नाइक के ही चेले हैं. मुर्ख बुद्दी राहुल कहीं भी वेदों में गों मांस ही नहीं मासाहार ही वर्जित है. वैसे तो तुम्हारे अनुवाद और तुम जैसे लोग और कुछ मुर्ख हिंदू जिनके लिए एक ही प्रमाण होता है हिंदू शास्त्रों को बदनाम करने के लिए जोकि "संस्कृतवाक्यंप्रमाणम्" पर आधारित है मतलब संस्कृत के किसी भी वाक्य को उठाकर प्रमाण के तौर पर रख देते हो चाहे वो प्रक्षिप्त वाक्य किसी हरामी धूर्त का बनाया हो जिसका विद्वानों के मध्य कोई मूल्य ना हो किसी प्रामाणिक ग्रन्थ का भी नहीं हो और तुम्हे इस बात को बताया भी जाए फिर भी तुम लोग अपनी संकीर्ण धुर्त बुद्दी से हरकतें करने से नहीं मानोगे. जो तुम प्रमाण देते फिरते हो वो कोई भी मान्य नहीं हैं किसी बेवकूफ के अनुवाद या प्रक्षिप्त अर्थात मिलावट किये हुए वाक्य भर हैं.

February 23, 2010 at 11:42 AM
सौरभ आत्रेय said...

इन लोगो को ये भी पता है लौकिक या वैदिक संस्कृत अधिकतर लोगो को नहीं आती इसलिए ये या इन जैसे लेखक अपनी बातों को अपने मनगढंत अर्थ के रूप में परोस देते हैं जैसे अनवर जमाल ऋग्वेद के प्रथम मंडल के १०५ वें सूक्त के चौथे श्लोक १:१०५:४ का अर्थ जो यहाँ दे रहे हैं उसका कोई इस श्लोक से लेना-देना ही नहीं है पर चूँकि लोगो को पता नहीं इसलिए सोचते होंगे कुछ लोग इनके बोद्दिक जेहाद में फंस जायेंगे.

मुर्ख जेहादियों और उनके अनुयायिओं इस सूक्त का अर्थ यह है - "विद्या को चाहने वाले ब्रह्मचारियों को चाहिए कि विद्वानों के समीप जाकर अनेक प्रकार के प्रश्नों को करके और उनसे उत्तर पाकर विद्या को बढावें. और हे पढाने वाले विद्वानों ! तुम कहो 'स्वागतम' आओ और हम से इस संसार के पदार्थों कि विद्या को सब प्रकार से जानकार ओरों को पढकर सत्य और असत्य को यथार्थभाव से समझाओ".

अब देखिये इनके अज्ञान और धूर्तता की पराकाष्ठा को श्लोक का अर्थ क्या है और उसका ये क्या अनर्थ पेश कर रहे हैं.

February 25, 2010 at 9:15 AM
सौरभ आत्रेय said...

मेरे उपरोक्त वर्णित उदाहरण से लोगो को समझना चहिये इसी प्रकार से ये लोग अन्य श्लोकों का गलत अर्थ पेश करते हैं या फिर कोई श्लोक अप्रमाणिक और अमान्य पुस्तक से लेते हैं या फिर वो श्लोक किसी मान्य प्रामणिक पुस्तक में प्रक्षिप्त अर्थात मिलावट किया हुआ अमान्य होता है और या फिर किसी अविद्वान व्यक्ति द्वारा अर्थ किया हुआ होता है. इसीलिए इनकी जेहादी बातों में कोई ना फंसे और इनका प्रत्येक जगह तिरस्कार करें.

February 25, 2010 at 9:22 AM
Satish Chand Gupta said...

महोदय सौरभ आत्रेय जी, मुझे आर्य समाज के किसी ज्ञानी की बडी तलाश थी, कुछ ज्ञान रखते हो तो आईये और कुछ ज्ञान ध्‍यान की नियोग की बातें किजिए, साथ ही यह भी बताईये जाकिर नायक से बहस कौन करेगा?

book: सत्‍यार्थ प्रकाश : समीक्षा की समीक्षा

स्‍वामी दयानंद सरस्‍वती द्वारा प्रतिपादित महत्‍वपूर्ण विषयों और धारणाओं को सरल भाषा में विज्ञान और विवेक की कसौटी पर कसने का प्रयास

http://satishchandgupta.blogspot.com/

विषय सूची

1. प्राक्कथन
2. सत्यार्थ प्रकाशः भाषा, तथ्य और विषय वस्तु
3. नियोग और नारी
4. जीव हत्या और मांसाहार
5. अहिंसां परमो धर्मः ?
6. ‘शाकाहार का प्रोपगैंडा
7. मरणोत्तर जीवनः तथ्य और सत्य
8. दाह संस्कारः कितना उचित?
9. स्तनपानः कितना उपयोगी ?
10. खतना और पेशाब
11. कुरआन पर आरोपः कितने स्तरीय ?
12. क़ाफ़िर और नास्तिक
13. क्या पर्दा नारी के हित में नहीं है ?
14. आक्षेप की गंदी मानसिकता से उबरें
15. मानव जीवन की विडंबना
16. हिंदू धर्मग्रंथों में पात्रों की उत्पत्ति ?
17. अंतिम प्रश्न

सतीश चंद गुप्‍ता का ब्‍लाग

October 22, 2010 at 2:20 PM
Anonymous said...

hahahha tabhi tum saalon ki zakir naik ke samne jakar pant geeli ho jati hai..tumhare maha guru sri sri ravi shankar bhi gaye the maa chudane aur apni marwa kar chale aaye zakir naik se ...video dekh lo saaf pata chal jayega ki tumhare ravi shankar to jhantu kuch nahin janta hindu dharam ke barein mein ...aisa karo tum harrr cheez ko to pooj hi lete ho..kabhi shiv ka lund to kabhi gaye ke than.>> :P...ab zakir naik ko bhi pooj hi lo aur aisa tum sab karte agar ye hindu hota...aaj wo muslim hai to issiliye galiyan de rahe ho..jhantu hindus...na dharam na dharam ki gandh...na sir ka pata na pair ka...aa jate hain apni maa chudane ..jisse dekho bhagwan banate hain saale...chootiye kahin ke...

October 24, 2010 at 1:56 AM
prasanna said...

Satya ek hai ek ishwar hai ek hi brahman hai ek hi joyri hai jisase sare sansar ki aatmao ka janam hua hai. vahi parmatma hai jo satya karm karega vo parmatma ban jayega yyani uski aatma ki joyti us mahan aatama m emil jayrgi. jai sadashiv jai omkara jai shankar

March 12, 2011 at 4:28 PM
muhammad ansaar said...

क़ुरआन में मूर्ति पूजा का विरोध
मूर्ति पूजा के लिए कुरआन में एक उदाहरण प्रस्तुत किया गया है, जो सोच विचार करने योग्य है-
‘‘अल्लाह को छोडकर तुम जिन (मूर्ति, क़ब्र व अस्थान वालों) को पुकारते हो, वे सब मिलकर एक मक्खी भी पैदा नहीं कर सकते (पैदा करना तो दूर की बात है) यदि मक्खी उनके सामने से कोई वस्तु (प्रसाद आदि) छीन ले जाए तो वे उसे वापस भी नहीं ले सकते। माँगने वाला और जिससे माँगा जा रहा है दोनों कितने कमजोर हैं और उन्होने अल्लाह का इस तरह महत्व नहीं समझा जैसा समझना चाहिए था। निस्संदेह अल्लाह शाक्तिशाली और ज़बरदस्त है।’’
(अनुवाद कुरआन, हज 22:73-74)
कितना सटीक उदाहरण है। बनाने वाला तो स्वयं अल्लाह है। अपने हाथों से बनाई गयी मूर्तियों और बुतों के बनाने वाले बेख़बर मनुष्य हैं। यदि इन मूर्तियों में थोडी बहुत समझ होती तो वे मनुष्यों की उपासना करतीं।

November 22, 2011 at 8:57 PM
Vivek Tiwari said...

kya hame huminity ko bhola kar.aapne aapne darm ko boalne ka aadikar mil gaya hai, ya vikas ke liye manavta jaruri hai .islam me to begunaho ka khoon kar ne wale ko ibleesh kaha gaya hai.phir aaj jo muslim log ye kaam karte hai une kyo bada banate ho.....

July 10, 2012 at 7:55 PM
karan sharma said...

zakir naik ek pagal insan hai.Hinduo ke bare main bolne ka kya matlab
hindustan main paida ho kar wo yahan ke dharm ki izat nahi karta.
abe jo ved ko padta hai wo gyani ho hata hai.kabul karo or wo pagal hai maha pagal.ye zakir ko gali dene ka man karta hai kyon ki aane wale samay ka antakwadi hai.

September 1, 2012 at 5:38 PM
Anonymous said...

ye sale katwe mulle.....inko bane abhi 1400 saal hi hue h kyonki inki ma behno ko 1400 saal pehle choda tha hum hinduo ne.....

October 10, 2012 at 6:27 PM
Anonymous said...

abe randiii k beez rahul tujhme aur nursery wale bachho jaisa dimag hi h.....tujhe shayad pata nahi h k surya bhi brahmand k chakkar lagata h....aur rahi baat prithvi ki to yaha par prithvi ko iski kaksha me sthapit karne ki baat ki h....

October 10, 2012 at 6:31 PM
Anonymous said...

abhi kisi ne upar likha ki hindu shiv k ling(yaha usne penis bataya h)ki pooja karte h......lekin vastav m to kisi ko shivling ka matlab bhi nahi pata.....shivling(yaha par ling ka arth h "pratik/chinh"...arthat jo bhagwan shiv ka bodh karaye ya jo shiv ka pratik h wo shivling h....aur shivling ki pooja ka prachalan jyotirmay agni stambh/ling k prakat hone k baad shuru hua tha...)

October 10, 2012 at 6:38 PM
Anonymous said...

sale in katwo ka nabi/rasool bahut bada betichod tha...jisne apni beti apne chacha k ladke hazrad lodudin ali se byah di.......in katwo ka na koi imaan h na dharam.....ye sab apni maa,mausi,fufi,mami,chachi ko chodkar paida hue h............

October 10, 2012 at 6:42 PM
Anonymous said...

abe slao katwo tum kehto ho ki hum shiv k ling ki pooja karte h abe salo kam se kam humare bhagwan ka ling to h lekin tumhare allah k to lund b nahi h tabhi to katwa kehte h...kyo..hahaha.

October 10, 2012 at 6:49 PM
ASHOK GOYAL said...

sab galat likha hai ye sachai janni he to is link par jaakar padh lo
ye ulta sidha likhne walo ko agar kisi baat ka jawab chahiye to mujse baat kare me dunga
shakal ke to they hi nahi ab akal ke bhi nahi rahe
SHIVLING KA ARTH KYA HAI IS BLOG ME LIKHA HAI PADH LIJIYE SABHI HINDU OR MUSLIMS BHAI
http://hindudharam.com/post.aspx...
NA KOI DHARAM BURA HAI NAA KISI ME BURAI HE SIRF KUCH LOG GALAT HO JATE HAI
http://hindudharam.com/post.aspx?id=112

July 5, 2013 at 12:40 AM
Anonymous said...

Mohammad Ansar Jab tum bol rahe ho मूर्ति पूजा के लिए कुरआन में एक उदाहरण प्रस्तुत किया गया है, जो सोच विचार करने योग्य है-
‘‘अल्लाह को छोडकर तुम जिन (मूर्ति, क़ब्र व अस्थान वालों) को पुकारते हो, वे सब मिलकर एक मक्खी भी पैदा नहीं कर सकते

Jab tumhare kuran mai likha hai toh bas padte ho ki amal bhi karte ho... vo kabra hi toh hai jaha tum sish zukate ho "

Ham to raam naam ko bhi poojte hai " Kyoi Raam naam ka patthar bhi ter gaya tha"
Toh kyo tum log 786 aur allah ka naam likh kar deevaro , gadiyo mai lagate ho

February 20, 2015 at 9:44 AM
shyam fulara said...

duniya mai 90% katue aatankvadi hai fir bhi kahte hamara dharm sabse acha or sabse nek hai

September 9, 2015 at 3:43 PM
Ravi said...

कोई हैं जो अल्लाह का मतलब बता सके

June 18, 2016 at 5:14 PM
octopus said...
This comment has been removed by the author.
octopus said...

Makhi kya tumhra koi bhi jise tum mante ho.. vapas laa Santa hai kya prashad...

July 9, 2016 at 12:38 AM
Anonymous said...

Allah/God/bhagwan sab aik h.na Hindu na Muslim n Christian aur na koi aur dharm ka insan ye keh sakta h k use banane wala aur baki dharmo ke logo ko banane wala god alag hai. Jab hum sab ko banane wala is duniya ko chalane wala aik hai to us hisab se hum sab aik god k banaye hue h.
Ab aap ye samjho k jab aap Kisi dusre dharm k god ka naam lekar galiyan gandi baateon krte Ho to aap indirectly us god ko gaali dete Ho jisne Hu sab ko banaya kyunki naam alag h lekin hai to wo aik hi na
Man lo Kisi aadmi ke do naam Ho to use Kisi bhi naam se gaali do to wo gali usi aadmi ko hi lagegi.
Is tarah k blog aur usme is tarah Ki ladayi shayad Kisi KO shobha nahi deti.
Umeed krta Hu sabhi dharm k bhai meri baat se sehmat honge.

August 14, 2016 at 1:01 AM
Rajesh kumar said...

बेटा!! तुम जैसे गाय खाने वाले की गांड मारने के लिए ही कृष्ण ने जन्म लिया था। और तूने जो महाभारत में गौ के बारे में लिखा है वो तेरी तरह ही गांडू ज्ञान है। इसमें श्राद्ध कर्म में गौ दान करने के लिए लिखा गया है जो आज भी श्राद्ध कर्म के अंत में गौ दान किया जाता है। उर्दू और फ़ारसी पढ़ने वालों को संस्कृत कब से समझ में आने लगा।
इतना ही वेद का ज्ञान होता तो तू आज साधू बन के लोगों की सेवा कर रहा होता।

September 7, 2016 at 11:58 PM
Rajesh kumar said...

बेटा!! तुम जैसे गाय खाने वाले की गांड मारने के लिए ही कृष्ण ने जन्म लिया था। और तूने जो महाभारत में गौ के बारे में लिखा है वो तेरी तरह ही गांडू ज्ञान है। इसमें श्राद्ध कर्म में गौ दान करने के लिए लिखा गया है जो आज भी श्राद्ध कर्म के अंत में गौ दान किया जाता है। उर्दू और फ़ारसी पढ़ने वालों को संस्कृत कब से समझ में आने लगा।
इतना ही वेद का ज्ञान होता तो तू आज साधू बन के लोगों की सेवा कर रहा होता।

September 7, 2016 at 11:59 PM

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