Tuesday, March 2, 2010

नेपाल में भारतीय मूल के प्रकाशक की हत्या

विद्रोही गुटों ने ली जिम्मेदारी
काठमांडू । नेपाल की राजधानी काठमांडू के एक बेहद सुरक्षित क्षेत्र में दिनदहाड़े मीडिया से जुड़े एक विवादास्पद व्यक्ति की हत्या के एक महीने से भी कम समय बाद दक्षिणी नेपाल में सोमवार को भारतीय मूल के एक प्रकाशक की अज्ञात बंदूकधारियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। दो स्थानीय विद्रोही गुटों ने इस हत्या की जिम्मेदारी ली है। पुलिस ने मंगलवार को बताया कि नेपाली दैनिक 'जनकरपुर टुडे' के प्रकाशक अरुण सिंघानिया (50) पर हमलावरों ने सोमवार शाम गोली चलाई थी। उस समय अरुण होली का त्योहार मनाकर घर लौट रहे थे। पुलिस के अनुसार हमलावर मोटरसाइकिल से आए थे और उन्होंने अरुण पर नजदीक से गोली चलाई। उन्हें तीन गोलियां लगी थी। सिंघानिया का मीडिया समूह एक एफएम रेडियो स्टेशन और एक इंटरनेट पोर्टल भी चलाता है। वह एक महीने की भारत यात्रा के बाद रविवार को धनुषा जिले के जनकपुर लौटे थे। रिपोर्ट के मुताबिक नई दिल्ली में उनका बेटा राहुल एमबीए की पढ़ाई कर रहा है। उसी से मुलाकात के लिए वह वहां पहुंचे थे। काठमांडू में उद्योगपतियों ने प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल से मुलाकात कर उन्हें चेतावनी दी है कि यदि एक महीने के अंदर सुरक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं होता है तो देश के सभी उद्योग और व्यापार बंद कर दिए जाएंगे। भारतीय मूल के प्रकाशक की हत्या के खिलाफ व्यापारिक संगठनों ने मंगलवार को जनकपुर बंद का आह्वान किया है। नेपाली पत्रकार संघ ने भी हत्या की निंदा की है। संघ ने कहा कि हमलावारों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर जनकरपुर में प्रदर्शन किया जाएगा। तराई इलाके में सक्रिय दो हथियारबंद गुटों, पूर्व माओवादियों के एक दल तराई जनतांत्रिक मुक्ति मोर्चा (राजन मुक्ति) और तराई जनतांत्रिक पार्टी-मधेस ने हत्या की जिम्मेदारी ली है.

3 comments:

उम्दा सोच said...

हमे तो लगता था कि बस आस्ट्रेलिया मे ही…

ससुर ई तो बहादुर लोग भी …

इन तराई वालो को खूब तराई करने की आवश्यक्ता है , समझ जाओ नहि यहा भी शन्तिसेना लगानी पडेगी !!!

March 3, 2010 at 3:04 PM
k g said...

भारत की लचर विदेश नीति का ही परिणाम है कि नेपाल जैसे मित्र देश में भी भारत विरोधी भावना फल फूल रही है i जबकि नेपाल के विकास में , श्री लंका के विकास में ,बंगला देश के विकास में भारत ने कितनी सहायता कि है और ये देश जब मर्जी होती है भारत को आंख दिख देते है i

March 3, 2010 at 5:32 PM
भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

के जी साहब ने ठीक लिखा है.

March 5, 2010 at 9:17 PM

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